Surya ratan manik ( Ruby Stone ) - सूर्य रत्न माणिक्य

Write By: Dr. R. B. Dhawan
Post By: Sandip Dhawan
Created Date: 2015-12-31 Hits: 893 Comment: 0

सिंहं लग्न के लिये माणिक्य अत्यन्त शुभ फलदायक रत्न है। इस लग्न के जातकों को आजीवन माणिक्य धारण करना चाहिये। इसके धारण करने से जातक शत्रुओं के मध्य में निर्भय होकर रह सकता है।

यह लाल रंग का एक बहुमूल्य पत्थर है, जा कि 24 रत्ती क े ऊपर हाने पर लाल कहलाता है।
यह एक बहुमूल्य रत्न है। रंग में गुलाबी, श्याम भी होता है।
श्रेष्ठ माणिक्य लाल कमल की पंखुडि़यों के समान निर्मल, देखने में सुन्दर, गोल, समान अंग-अवयव वाला और दीप्तीमान होता है।
जिस माणिक्य को प्रातःकाल सूर्य के सामने रखते ही उसमें से लाल रंग की किरणें बिखरनें लगें वह माणिक्य उत्तम गुण वाला होता है, यह सूर्य की आभा के समान प्रकाषित होता है।
माणिक्य सूर्य का रत्न है। इसलिये सूर्य जिस कुण्डली में किसी शुभ भाव का स्वामी हो तो उसके जातक के लिये माणिक्य शुभ फलदायक होगा।
राषि के अनुसार उपयुक्तता - मेष लग्न में सूर्य पंचम त्रिकोण का स्वामी है और लग्नेष मंगल का मित्र है। अतः मेष लग्न के जातक बुद्धि बल प्राप्त करने, आत्मोन्नति के लिये तथा सन्तान सुख, प्रसिद्धि, राज्य कृपा के लिये माणिक्य धारण कर सकते हैं। वृषश् लग्न की कुण्डली में सूर्य चतुर्थ केन्द्र का स्वामी है, परन्तु सूर्य लग्नेष शुक्र का शत्रु है। इसलिये इस लग्न के जातकों को माणिक्य नही धारण करना चाहिये। मिथुन लग्न की कुण्डली में सूर्य तृतीय भाव का स्वामी होगा। अतः जातक सूर्य की दशा समय में माणिक्य धारण कर सकते हैं। कर्क लग्न में सूर्य की महादषा में माणिक्य विषेष परिस्थिती में शुभ फल दायक होगा। सिंह लग्न के लिये माणिक्य अत्यन्त शुभ फलदायक रत्न है। इस लग्न के जातकों को आजीवन माणिक्य धारण करना चाहिये। इसके धारण करने से जातक शत्रुओं के मध्य में निर्भय होकर रह सकता है। और शत्रु पक्ष से उनके विरूद्ध जो भी कार्यवाही होगी उससे उनकी बराबर रक्षा होती रहेगी।
यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा करेगा। और आयु में वृद्धि होगी। इस लग्न के जातक अत्यन्त भावुक होते हैं। अतः अपने मानसिक संतुलन को बनाए रखने तथा आत्मबल की उन्नति के लिए सदा माणिक्य धारण करना चाहिये। कन्या लग्न में सूर्य द्वादष का स्वामी होता है। इस लग्न के जातक को माणिक्य कभी नहीं धारण करना चाहिये। तुला लग्न की कुण्डली में सूर्य जो लग्नेष शुक्र का शत्रु है, एकादष (लाभ) भाव का स्वामी होता है। इस लग्न के जातक को माणिक्य केवल सूर्य की महादषा में धारण करना शुभ फलदायक होगा। वृष्चिक लग्न में सूर्य दषम भाव का स्वामी होता है। यहाँ सूर्य लग्नेष का मित्र होता है। अतः राज्य कृपा, प्रतिष्ठा प्राप्ति, मान-सम्मान, व्यवसाय या नौकरी में उन्नति के लिये माणिक्य धारण करना शुभ होगा। धनु लग्न में सूर्य नवम (भाग्य) भाव का स्वामी होता है। यहाँ भी वह, लग्नेष का मित्र है। अतः धनु लग्न के जातक माणिक्य भाग्योन्नति, आत्मोन्नति तथा पितृ सुख के लिये आवष्यकतानुसार धारण कर सकते हैं। सूर्य की महादषा में माणिक्य विशेष रूप से शुभ होगा। मकर लग्न के लिये सूर्य अष्टम भाव का स्वामी होता है। इसका लग्नेष शनि और सूर्य में परस्पर शत्रुता है। अतः इस लग्न के जातक को माणिक्य कभी नहीं धारण करना चाहिये। कुम्भ लग्न में सूर्य सप्तम भाव का स्वामी होता है जो भाव विषेष रूप से मारक स्थान है और क्योंकि सूर्य मारकेष होकर लग्नेष का शत्रु है। अतः हम इस लग्न के जातको को माणिक्य से दूर ही रहने की सलाह देगें। मीन लग्न के जातकों को भी माणिक्य धारण करना उचित न होगा। क्योंकि इस लग्न में सूर्य षष्ठ भाव का स्वामी होता है। इस लग्न में एक अपवाद हो सकता है क्योंकि सूर्य लग्नेष बृहस्पति का मित्र है। अतः यदि वह षष्ठ का स्वामी होकर षष्ठ भाव ही में स्थित हो तो सूर्य की महादषा में माणिक्य धारण किया जा सकता है।

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